मुख्य परीक्षा पिछले वर्षों के प्रश्न
संघ लोक सेवा आयोग के सिविल सेवा परीक्षा में प्रभावी निबंध लेखन की कला

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) हर साल सिविल सेवा परीक्षा (CSE) आयोजित करता है, जिसका उद्देश्य भविष्य में देश के विकास में केंद्रीय भूमिका निभाने वाले अभ्यथियों की पहचान और चयन करना है। लोक सेवा में विभिन्न भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को दक्षतापूर्ण ढंग से पूरा करने के लिए, सिविल सेवकों के पास कुछ कौशल और क्षमताएं होनी आवश्यक हैं, जिनका मूल्यांकन मुख्य परीक्षा के निबंध पेपर के माध्यम से किया जाता है।
संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में निबंध लेखन का महत्त्व
निबंध पेपर के माध्यम से, UPSC विभिन्न विषयों पर अभ्यर्थियों के ज्ञान और रुचि का पता लगाता है। इसके अतिरिक्त, यह अभ्यर्थियों के विश्लेषणात्मक कौशल, विचारों को एकत्र करने और विचारों की अभिव्यक्ति के तरीके का सुसंगत और तार्किक ढंग से मूल्यांकन करता है। दूसरे शब्दों में, किसी मुद्दे के इर्द-गिर्द विभिन्न आयामों में मनोरंजक और विचारशील ढंग से कहानी गढ़ने बुनने और अभिव्यक्ति की क्षमता का मूल्यांकन किया जाता है।
निबंधों की दो श्रेणियां
विगत वर्ष के प्रश्नों के सावधानीपूर्वक विश्लेषण के आधार पर इस पेपर में आए निबंधों के विषयों को मोटे तौर पर दो वर्गों में बांटा जा सकता है। पहला, सूचना-आधारित निबंध, और दूसरा, दार्शनिक पहलू वाले निबंध। सूचना-आधारित निबंध मुख्य रूप से निबंध विषय के ज्ञान-संबंधी पहलू पर निर्भर होते हैं, जिसमें तथ्य, साक्ष्य, आदि शामिल होते हैं। जबकि, दार्शनिक पहलू वाले निबंध विविध व्याख्याओं के साथ अमूर्त विषयों और विचारों से संबंधित होते हैं।
इसलिए, निबंध पेपर की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को दोनों प्रकार के निबंधों के लेखन में सहज होना चाहिए, विशेष रूप से दार्शनिक विषयों पर आधारित निबंध, जो हाल के वर्षों में UPSC द्वारा मुख्य रूप से पूछे गए हैं।
निबंध लेखन की शुरुआत
निबंध एक गैर-काल्पनिक गद्यांश लिखने जैसा कार्य है, जो किसी विषय या शीर्षक के इर्द-गिर्द तर्कों, उसके विश्लेषणों, चर्चाओं और समाधान के रूप में लिखा जाता है। निबंध का सारतत्व उसकी संरचना और प्रवाह में निहित होता है। बेहतर संरचना और प्रवाह से युक्त एक अच्छी तरह से संरचित निबंध सावधानीपूर्वक डिजाइन की गई एक इमारत की तरह होता है जिसमें एक मजबूत नींव और अच्छी वास्तुकला की जरुरत होती है। एक निबंध की संरचना अनिवार्य रूप से एक परिचय, मुख्य भाग और निष्कर्ष नामक तीन भागों को मिलाकर बनाई जाती है।
परिचय निबंध के लिए एक गेट की तरह होता है और इसमें निबंध की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला जाना चाहिए। मुख्य भाग किसी निबंध का वह महत्वपूर्ण भाग है, जो लेखक को कम शब्दों में निबंध के कई आयामों व विषयों पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करता है। निष्कर्ष एक समापन कथन के माध्यम से निबंध को पूर्णता प्रदान करता है। निष्कर्ष में, परिचय के बाद कनेक्टिंग पैराग्राफ में उठाये गए मुद्दों पर, अल्पकालिक और दीर्घकालिक, दोनों प्रकार के व्यावहारिक समाधान दिए जा सकते हैं।
निबंध के सही शीर्षक (Right Topic) का चयन
प्रभावी निबंध लेखन की शुरुआत सही शीर्षक चुनने और उसकी सही समझ से होती है। किसी अभ्यर्थी को किसी शीर्षक को केवल इसलिए नहीं चुनना चाहिए क्योंकि वह शीर्षक से परिचित है और वह शीर्षक उसे उत्साहवर्धक लगता है। शीर्षक का चयन स्वयं के पास विषयवस्तु की पर्याप्तता के साथ विषय की अच्छी समझ पर आधारित होना चाहिए। इसलिए, वास्तव में निबंध लेखन शुरू करने से पहले निबंध के शीर्षक के संबंध में जरूरी विषयवस्तु पर विचार-मंथन करने के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए।
विषयवस्तु पर विचार-मंथन (Brainstorming)
विचार-मंथन शीर्षक के विभिन्न पहलुओं को पहचान कर विषयवस्तु निर्माण में सहायता करता है। यह आसान शब्दों में शीर्षक से संबंधित विचारों को समेकित करता है, जो न केवल निबंध के मुख्यभाग के लिए, बल्कि निबंध के विविध प्रकार के परिचय और निष्कर्ष तैयार करने के लिए भी उपयोगी होते हैं।
परिचय पर विचार-विमर्श करना
निबंध के शीर्षक के सारतत्व के आधार पर, एक अभ्यर्थी को विचारपूर्वक उस प्रकार के परिचय का चयन करना महत्वपूर्ण है जो शीर्षक से मेल खाता हो। यहां उल्लेखनीय व्यक्तित्वों, व्यावहारिक उद्धरणों, विचारोत्तेजक कहानियों या आकर्षक कथनों के माध्यम से एक आकर्षक परिचय लिखा जा सकता है। अभ्यर्थी का लक्ष्य एक ऐसा परिचय लिखना होना चाहिए, जो न केवल निबंध के विषय से मेल खाता हो बल्कि शुरू से ही पाठक की रुचि को आकर्षित करता हो, और बाद की चर्चा के लिए आधार का निर्माण करता हो।
मुख्य भाग: निबंध का सबसे महत्वपूर्ण भाग
मुख्य भाग निबंध का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जो अभ्यर्थी के बहुआयामी विचार क्षमता, विश्लेषणात्मक क्षमता, समय प्रबंधन कौशल सहित कई गुणों को दर्शाता है। इस भाग में लिखी गई व्याख्याएं विविधतापूर्ण होने चाहिए, जो कि निबंध की विषय वस्तु के आधार पर विभिन्न क्षेत्रकों, जैसे- सामाजिक, राजनीतिक, ऐतिहासिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, पर्यावरण, नैतिक आदि पर आधारित हो सकते हैं।
वैकल्पिक रूप से, इसे सामयिक आधार पर लिखा जा सकता है जैसे कि प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत, आधुनिक भारत, स्वतंत्रता व उदारीकरण के बाद तथा समकालीन भारत, आदि। निबंध के मुख्य भाग में शीर्षक से जुडी संभावनाएं, मुद्दे, चुनौतियां और समाधान, जहां भी हो सके, लिखे जाने चाहिए।
इन आयामों को लिखते समय मार्गदर्शक सिद्धांत यह है कि उन्हें संवैधानिक, कानूनी, नीतिशास्त्रीय, नैतिक और समाज के सांस्कृतिक रीति-रिवाजों के अनुरूप होना चाहिए। जहां भी संभव हो, उन्हें उपयुक्त उदाहरणों के साथ अच्छी तरह से प्रमाणित किया जाना चाहिए।
अंततः एक निष्कर्ष
निष्कर्ष लिखना काफी महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह मुख्य भाग के बिंदुओं का सारांश प्रदान करता है, मुख्य भाग में लिखी गई बातों को पुष्ट करता है, और एक स्थायी प्रभाव छोड़ता है, जिससे निबंध की प्रभावशीलता बढ़ जाती है। शीर्षक के विषय और अंतर्निहित विचार के आधार पर उद्धरण, संक्षिप्त कहानियों, कविताओं आदि का उपयोग करके विभिन्न तरीकों से प्रभावशाली निष्कर्ष प्रदान किए जा सकते हैं। किसी मुद्दे या चुनौतियों का समाधान प्रदान करने का प्रयास करते समय सुझावात्मक प्रकृति के निष्कर्ष भी लिखे जा सकते हैं। हालंकि, यह ध्यान रखना उचित है कि उन्हें व्यावहारिक होना चाहिए, आशावादी होना चाहिए और दूरदर्शी दृष्टिकोण पर आधारित होने चाहिए। परिचय के साथ निष्कर्ष को जोड़कर चक्रीय दृष्टिकोण अपनाने से पूरे निबंध में एक सुसंगतता प्राप्त की जा सकती है।
प्रस्तुतिकरण के जरिए विषयवस्तु और शैली को संतुलित करना
एक प्रभावी निबंध लिखने के लिए विषयवस्तु और लेखन शैली के बीच बेहतर संतुलन की आवश्यकता होती है। इसलिए, प्रस्तुतिकरण की विधियों के महत्त्व को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए। स्मार्ट प्रस्तुति से तर्कों की स्पष्टता और प्रभावशीलता में सुधार किया जा है, जिससे विचारों के अधिक प्रभावी प्रस्तुतीकरण का अवसर मिलता है। इसके अलावा, यह न केवल पाठक को आकर्षित करता है बल्कि एक बेहतर तार्किक संरचना भी प्रदान करता है और निबंध की स्पष्टता एवं सुसंगतता को बढ़ाता है।
टॉपर्स के अनुभवों से प्राप्त सीखें
पिछले वर्षों में परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जयादातर टॉपर्स ने निबंध को अधिक गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी बनाने में प्रस्तुति के लिए प्रयोग किये जाने वाले विभिन्न पद्धतियों के महत्त्व पर प्रकाश डाला है। उनकी उत्तर पुस्तिकाओं के विश्लेषण से शीर्षकों और उपशीर्षकों के उपयोग, सरल और संक्षिप्त भाषा, रेखाचित्रों के विवेकपूर्ण उपयोग, विषयवस्तु हाइलाइटिंग तकनीकों और छोटे पैराग्राफ के प्रभावी उपयोग का पता चलता है, जिससे विषयवस्तु की गुणवत्ता और प्रभाव बढ़ जाती है।
सही फीडबैक और निरंतर सुधार
निबंध लेखन कौशल को विकसित करने और सुधारने में पारंपरिक ज्ञान और टॉपर्स के अनुभवों से प्राप्त सीखों को अपनाने के लिए नियमित और निरंतर अभ्यास की आवश्यकता होती है। निबंध लेखन कौशल को तब और निखारा जा सकता है जब मेंटर्स, शिक्षकों और साथियों के बहुमूल्य फीडबैक के आधार पर उसमें निरंतर सुधार किया जाए। इन सब से प्राप्त गुणवत्तापूर्ण और रचनात्मक फीडबैक एक दर्पण की तरह होता है, जो अभ्यर्थी की क्षमताओं और सुधार के क्षेत्रों की पहचान करती है तथा अंततः निबंध लेखन कौशल को बेहतर बनाने का मार्ग प्रशस्त करती है।
निबंधों की प्रवृत्ति और परिप्रेक्ष्य का विश्लेषण
विगत वर्षों के प्रश्नपत्रों में आये निबंध के शीर्षकों के रुझान और पैटर्न का सावधानीपूर्वक विश्लेषण महत्वपूर्ण है। इसके जरिए कोई भी अभ्यर्थी निबंध के पेपर में पूछे गए विषयों, थीम्स और दृष्टिकोणों के संबंध में बेहतर समझ प्राप्त कर सकता है। विगत वर्षों के निबंधों का निरंतर विश्लेषण और अभ्यास लक्षित तैयारी, समय प्रबंधन और परीक्षा की तैयारी के स्तर का बेहतर समझ प्रदान करता है।
[ Analysis and Discussion of Essay Paper 2023]
निबंध लेखन का कार्य केवल किसी अभ्यर्थी की लेखन क्षमता का परीक्षण नहीं है, बल्कि आलोचनात्मक रूप से सोचने और खुद को स्पष्टता के साथ अभिव्यक्त करने की क्षमता का मूल्यांकन भी है। इसको ऐसे समझ सकते हैं जैसे निबंध को अपना कैनवास बनायें और शब्दों को अपना ब्रश, तत्पश्चात अपनी बौद्धिक क्षमता, विचारों और दृढ़ विश्वास से लेखन द्वारा निबंध रुपी चित्र बनाएं। ऐसा करने पर, कोई अभ्यर्थी न केवल परीक्षा की तैयारी करता है बल्कि बौद्धिक क्षमता और आत्म-अभिव्यक्ति की क्षमता को भी बढ़ाता है।



















